| वर्ष | P/E अनुपात | परिवर्तन |
|---|---|---|
| 2026 (TTM) | -215.49 | -100.00% |
| 2024 | 0.00 | -100.00% |
| 2023 | -60.65 | -4.36% |
| 2022 | -63.41 | 177.32% |
| 2021 | -22.87 | 140.02% |
| 2020 | -9.53 | -120.32% |
| 2019 | 46.88 | 603.88% |
| 2018 | 6.66 | 73.93% |
| 2017 | 3.83 | -66.01% |
| 2016 | 11.27 | -98.43% |
| 2015 | 718.11 | -1,853.11% |
| 2014 | -40.96 | -133.66% |
| 2013 | 121.70 | 0.00% |
| कंपनी | P/E Ratio | P/E Ratio अंतर | देश |
|---|---|---|---|
| 37.04 | -117.19% |
US
|
|
| 40.43 | -118.76% |
US
|
|
| - | - |
US
|
|
| 24.68 | -111.45% |
US
|
|
| -14.62 | -93.22% |
US
|
Price/Earnings (P/E) ratio यह दर्शाता है कि किसी कंपनी के शेयर का मूल्य उसके प्रति शेयर आय से कितना संबंधित है।
एक कम लेकिन सकारात्मक P/E यह संकेत देता है कि कंपनी की कम वैल्यू पर अधिक कमाई हो रही है, जो संभावित रूप से अंडरवैल्यूड हो सकती है। एक उच्च नकारात्मक (0 के करीब) P/E का मतलब है कंपनी को भारी नुकसान हो रहा है।
30 से अधिक या नकारात्मक P/E वाले शेयरों को सामान्यतः "विकासशील स्टॉक्स" माना जाता है — यानी निवेशक भविष्य में लाभ या ग्रोथ की उम्मीद करते हैं।
10 से कम सकारात्मक P/E वाले शेयरों को "मूल्य आधारित स्टॉक्स" माना जाता है — मतलब कंपनी पहले से लाभ में है और भविष्य में तेज़ ग्रोथ की संभावना कम है।